रेहमत हो थोडी खुदा की इधर,
तो हम भी जी ले जरा,
पलके उठावो थोडी इनायत मै इधर,
तो हम भी कर ले बगावत खुदा से जरा…
आज भी सजते है मैखाने,
उनके प्यार मै,
आज भी जलते है पैमाने ,
उनके याद मै,
पर अकेले चलना है उही इन राहो पे,
तो क्यु शर्त करे एक दीदार का,
और अकेले खोना है उही इन फासलो पे,
तो क्यु चाहत करे फिर एक मुलाकात का…
ख्वाबो के इस खेल मै,
अजीब दुनिया के मेल मै,
रेहमत हो थोडी खुदा की इधर,
तो हम भी जी ले जरा,
पलके उठावो थोडी इनायत मै इधर,
तो हम भी कर ले बगावत खुदा से जरा…
तो हम भी जी ले जरा,
पलके उठावो थोडी इनायत मै इधर,
तो हम भी कर ले बगावत खुदा से जरा…
आज भी सजते है मैखाने,
उनके प्यार मै,
आज भी जलते है पैमाने ,
उनके याद मै,
पर अकेले चलना है उही इन राहो पे,
तो क्यु शर्त करे एक दीदार का,
और अकेले खोना है उही इन फासलो पे,
तो क्यु चाहत करे फिर एक मुलाकात का…
ख्वाबो के इस खेल मै,
अजीब दुनिया के मेल मै,
रेहमत हो थोडी खुदा की इधर,
तो हम भी जी ले जरा,
पलके उठावो थोडी इनायत मै इधर,
तो हम भी कर ले बगावत खुदा से जरा…
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