Friday, 29 January 2016

थांबलोय मी…

थांबलोय मी,
खरंच थांबलोय मी,
जायचं असतं तर गेलो असतो कधीच,
पण आजही,
थांबलोय मी…

जुळायलाच हवय गणित,
असा ध्यास  नव्हताच कधी,
भरायलाच हवेत रंग,
असं चित्रही काढलंच नाही कधी,
जगन खरंच जगन होईल,
आयुष्य खूपच सुंदर होईल,
असा ध्यासही माझा नव्हताच कधी,

तरीही थांबलोय मी,
खरंच थांबलोय मी,
जायचं असतं तर गेलो असतो कधीच,
पण आजही,
थांबलोय मी…

वाट शोधली असती,
तर मिळाली असते बहुतेक,
मोजली असती पावले,
तर खुणा सापडल्या असत्या बहुतेक,
पायांचं चालन अन चालत वाट शोधण,
जमलं असतं बहुतेक,

तरीही थांबलोय मी,
खरंच थांबलोय मी,
जायचं असतं तर गेलो असतो कधीच,
पण आजही,
थांबलोय मी…

Thursday, 28 January 2016

तन्हाई भी कुछ चिज़ होती हैं ... वरना जुदाई का गम इस ज़माने में नहीं होता...

सलाम महफ़िल में ही नहीं होता,
दिलो का मिलना सिर्फ खयालो में ही नहीं होता,
तन्हाई भी कुछ चिज़ होती हैं दोस्तो,
वरना जुदाई का गम इस ज़माने में नहीं होता ...

कसूर नज़रों का होता तो पलकें बंद कर लेते हम ,
कशिश हवा की होती तो सांसे रोक लेते हम ,
दिए का जलना , फूलों  का खिलाना,
सबसे मुँह फेर लेते हम ,
पर खता तो दिल की थी ,
क्या महोब्बत करना छोड़ देते  हम ...

आँसू सिर्फ गमो से  नहीं  मिलते,
रिश्ते कभी दूरियों से  नहीं टूटते ,
दीवानगी भी कुछ चीज़ होती है,
वरना अपना नाम इस ज़माने में नहीं होता...

इश्क़ तो सुकून है सर्दियों का,
इश्क़ तो जूनून हैं वादियों का ,
कोई पायेगा खोके,
कोई खोएगा पके,
यही  तो दस्तूर है ज़िन्दगी का....
खयालो के इस भीड़ में ,
ज़माने/जीवन के इस दौड़ में ,
आज जाके बैठे है किसी और के जनाजे में ,
देंगे धोखा ख़ुद को,
जी रहे है उल्फत में फिर भी,
देके दिलासा सबको। ..

वे कहते थे कभी...
जरूरत ही सबसे बड़ी इबादत है ,
हम ने समझा,
उनकी इबादत ही हमारी सबसे  बड़ी जरूरत है....

माना उस दिन,
छोटी थी मेरी गली उजाले के लिए,
आज आके  लो ,
चमक रही है सारे ज़माने के लिए....


अहसान सिर्फ अपनोसे ही नहीं मिलता,
इन्तकाम सिर्फ दुश्मनों से ही नहीं मिलता ,
शिकायत भी कुछ चीज है दोस्तों ,
वरना खुदा का नाम ज़माने मै नहीं होता। ...

सलाम महफ़िल में ही नहीं होता
दिलो का मिलना सिर्फ खयालो में ही नहीं होता
तन्हाई भी कुछ चिज़ होती हैं
वरना जुदाई का गम इस ज़माने में नहीं होता ...

नाळ मैत्रीची तुटणार नाही …

कितीक येती हसून जाती ,
मनात सारे रुतून जाती ,
जरी सजवला आसमंत सारा ,
तरीही श्राध्द घालून जाती ….

कुणास ना हे कधी कळावे ,
उरलेच होते जे श्वास माझे,
घरट्याचे हि कुंपण फाटले,
आभाळाचे छत्र  हाटले,

लपवत फिरतो आज ही मित्रा ,
एक मैत्रीचा ध्यास वेगळा ,
चुकून कधीतरी तुला कळावा,
मैत्रीचा तो गोड गारवा …

चुकुदे गणित आज जगाचे ,
मोडूदेत हाथ आज मापाचे ,
उंबर्यावर जे सांडले थोडे ,
दाने ते आपल्याच प्रेमाचे ….

वाट पाहुनी थकणार नाही,
काम ते माझे सोडणार नाही,
हसुदे कुणीही मनसोक्त मित्रा ,
नाळ मैत्रीची तुटणार नाही …



Wednesday, 28 May 2014

मंजिल तक नहीं जाता …

कुछ बाते है ऐसी,
जो लबो पे नहीं आती,
महसूस होती है कमी हर पल,
पर शिकायत हो नहीं
बस एक ही आरजू है मेरे दिल की,
जो आज भी खुदा तक नहीं जति…

सांसो का चलना पहले भी था,
सोयी रात मैं जगना पहले भी था,
रंगो का उड़ना पलको से,
सपनो का साथ छोड़ना अरमानों से,
अपनी बदनामी का चर्चा,
तो पहले भी था,

कुछ वहम है ऐसा,
जो नज़रोंसे नहीं जाता,
महसूस होता है होश हर रोज ,
पर ये बेहोशीयो का पल नहीं जाता,
बस एक ही रास्ता नापा हैं मेरे दिल ने,
जो आज भी मंजिल तक नहीं जाता …
जो आज भी मंजिल तक नहीं जाता … 

Monday, 26 May 2014

बीती रात की याद...

बीती रात की याद मत दिलाओ यारों,
बस कुछ ऐसी गुजारी हैं,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ये जान भी नहीं जाती …

सांसो का सजना पलको पे,
क्या कभी देखा है यारों,
आँसुओ का हसना होटो पे,
क्या कभी सुना है यारों,
खुद का होके भी खुद का ना होना,
सब कुछ होके भी सब खो देना,
क्या ऐसा पल कभी जिया है यारों …

उन लम्हों की याद मत दिलाओ यारों,
बस कुछ ऐसी गुजारी हैं,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ये जान भी नहीं जाती …

दूरिया होक भी पास होना,
होश मैं होक भी बेहोश होना,
खयालो को लेके खयालो तक जाना,
मंजिलो से मिलने मंजिल को ले जाना,
ऐसा कभी सोचा है यारों,

बिखरे कुछ सपनो की याद मत दिलाओ यारों,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ओ ख्वाब भी नहीं जाते  …


अब किस किस को सुनए,
और किस किस को रुलाये,
अपने हिस्से का जो गम है,
क्यों औरो को जताये,

उन रास्तो की याद मत दिलाओ यारों,
के अब चल भी नहीं पाते,
और छोड़े भी नहीं जाते …


बीती रात की याद मत दिलाओ यारों,
बस कुछ ऐसी गुजारी हैं,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ये जान भी नहीं जाती …

किसी एक का तो साथ निभाते तो अच्छा होता …

जो बचा है होश थोड़ा ,
उसे खो जाने दो,
जो बची है सांसे थोड़ी,
उसे छूट जाने दो,
क़यामत तो आयेगी आज नही तो कल तो,
तब ही सही,
अपना हिसाब हो जाने दो…


रब का वास्ता न देते तो अच्छा होता,
सहा है जिसने उसे याद करते तो अच्छा होता,
गम मैं हाथ छोड़ने की आदत तो पुरानी है आपकी,
किसी एक का तो साथ निभाते तो अच्छा होता … 

Thursday, 8 May 2014

न भांडता एक दिवस...देवाशी बोलायचंय!

चालत चालत रस्ता,
कुठे तरी थांबायचंय,
न भांडता एक दिवस,
देवाशी बोलायचंय….

रमून खूप झालं,
हसून खूप झालं,
पळून खूप झालं,
दमून खूप झालं,
आता कुठे तरी थांबायचंय,
चालत चालत रस्ता,
एकदा तरी आस्तित्व शोधायचंय …


पावसाची सर वाहून कधीच गेली,
मातीचा गंध हरपून कधीच गेला,
चंद्राची कोर,
बैल गाढीची ओढ,
संपून कधीच गेली!

रडून ही खूप झालं,
चिडून ही खूप झालं,
चुकून ही खूप झालं,
मरून ही खूप झालं,
आता कुठे तरी थांबायचंय,
चालत चालत रस्ता,
एकदा तरी स्वतःला शोधायचंय …


पैक्याशी मैत्री जेव्हा झाली,
नात्यांची ओढ तेव्हाच गेली,
पापाशी दोस्ती जमली जेव्हा,
देवाशी गट्टी झालीच तेव्हा,

कमावून ही खूप झालं,
दाखवून ही खूप झालं,
एकटपण खूप झालं,
अन हारणं ही खूप झालं…
आता कुठे तरी थांबायचंय,
चालत चालत रस्ता,
एकदा तरी स्वतःला शोधायचंय …

चालत चालत रस्ता,
कुठे तरी थांबायचंय,
न भांडता एक दिवस,
देवाशी बोलायचंय….