शिकायत कुछ और थी,
नजाकत कुछ और थी,
धुप मैं सजी अपनी छाव,
कुछ और थी!
आप ना आते,
दिल ना लगाते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
बस तीखे बोल थे,
हर सुबहो के !
और कटते थे सिर,
हर सितारों के !
डूबती होड़ी थी अरमानो की,
और कसूर पलकोंके हर अफसानों के !
रासता नही जुड़ता,
कारवां नहीं मिलता,
दिया नही जलाता,
और प्यार नही होता,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
तनहाई ढूंढ रही थी,
सुकून ज़िन्दगी का!
मन खोज रहा था,
रासता मुस्कान का!
धड़कता जिया,
हो जाता बावरा एक दिन,
पागल मन,
हो जाता किनारा एक दिन !
ना मिलते आप इस तरह ,
ना जुड़ती सांसे इस तरह,
चाहत की झोली ना भारती,
और आसान ना होता जीना इस तरहा !
आप ना आते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
शिकायत कुछ और थी,
नजाकत कुछ और थी,
धुप मैं सजी अपनी छाव,
कुछ और थी!
आप ना आते,
दिल ना लगाते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
नजाकत कुछ और थी,
धुप मैं सजी अपनी छाव,
कुछ और थी!
आप ना आते,
दिल ना लगाते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
बस तीखे बोल थे,
हर सुबहो के !
और कटते थे सिर,
हर सितारों के !
डूबती होड़ी थी अरमानो की,
और कसूर पलकोंके हर अफसानों के !
रासता नही जुड़ता,
कारवां नहीं मिलता,
दिया नही जलाता,
और प्यार नही होता,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
तनहाई ढूंढ रही थी,
सुकून ज़िन्दगी का!
मन खोज रहा था,
रासता मुस्कान का!
धड़कता जिया,
हो जाता बावरा एक दिन,
पागल मन,
हो जाता किनारा एक दिन !
ना मिलते आप इस तरह ,
ना जुड़ती सांसे इस तरह,
चाहत की झोली ना भारती,
और आसान ना होता जीना इस तरहा !
आप ना आते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....
शिकायत कुछ और थी,
नजाकत कुछ और थी,
धुप मैं सजी अपनी छाव,
कुछ और थी!
आप ना आते,
दिल ना लगाते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.… जिंदगानी कुछ और होती....