Friday, 25 April 2014

मेरी कहानी कुछ और थी, ये जिंदगानी कुछ और होती....

शिकायत कुछ और थी,
नजाकत कुछ और थी,
धुप मैं सजी अपनी छाव,
कुछ और थी!
आप ना आते,
दिल ना लगाते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.…  जिंदगानी कुछ और होती....

बस तीखे बोल थे,
हर सुबहो के !
और कटते थे सिर,
हर सितारों के !
डूबती होड़ी थी अरमानो की,
और कसूर पलकोंके हर अफसानों के !

रासता नही जुड़ता,
कारवां नहीं मिलता,
दिया नही जलाता,
और प्यार नही होता,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.…  जिंदगानी कुछ और होती....

तनहाई ढूंढ रही थी,
सुकून ज़िन्दगी का!
मन खोज रहा था,
रासता मुस्कान का!
धड़कता जिया,
हो जाता बावरा एक दिन,
पागल मन,
हो जाता किनारा एक दिन !

ना मिलते आप इस तरह ,
ना जुड़ती सांसे इस तरह,
चाहत की झोली ना भारती,
और आसान ना होता जीना इस तरहा !

आप ना आते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.…  जिंदगानी कुछ और होती....

शिकायत कुछ और थी,
नजाकत कुछ और थी,
धुप मैं सजी अपनी छाव,
कुछ और थी!
आप ना आते,
दिल ना लगाते,
तो मेरी कहानी कुछ और थी,
ये.…  जिंदगानी कुछ और होती....

Wednesday, 23 April 2014

एक दिवस पुन्हा जगायचंय…

मनसोक्त झोपून एकदा उठायचंय,
मनसोक्त रडून एकदा हसायचंय,
मनसोक्त डुंबून एकदा पोहायचंय,
न पीता एक दिवस पुन्हा जगायचंय…

भरलेला घडा,
फुटणार आज ना उद्या !
आलेला पूर,
बुडवणार आज ना उद्या !
सुटलेला वारा,
संपलेला दिवस,
घेऊन जाणार आज ना उद्या !

म्हणून,
मनसोक्त दमून एकदा खेळायचंय,
मनसोक्त थांबून एकदा चालायचंय,
मनसोक्त बसून एकदा बोलायचंय,
अंन न पीता एक दिवस पुन्हा लिहायचंय…

गुदमरलेला श्वास,
रुसणार  आज ना उद्या !
आलेले नशिब,
भोग देणार आज ना उद्या !
जोडलेली नाती,
भावनांची शेती,
हरवुन जाणार आज ना उद्या !

म्हणून!
न पीता एक दिवस मना संगे उडायचंय,
न पीत एक दिवस फक्त तुझ्या सोबत फुलायचंय,
न पीता एक दिवस पुन्हा जगायचंय…    

Tuesday, 1 April 2014

प्यार की कश्ती...

प्यार की कश्ती को,
डूबाके आये है,
भरी महफ़िल से,
शमा बुझाके आये है,
अरे पागल ये मत बता,
की गम क्या होता है,
हम तो दर्द का पूरा समन्दर पिलाके आये है। … 

जो नज़रें हटती नही थी हमसे,
उसे रुलाके आये है,
जो सांसे कभी महकती थी हमसे,
उसे ठुकराके आये है,
अरे पागल ये मत  बता,
की यादे क्या होती है,
हम तो सपनो का पूरा पहाड़ जलाके आये है। … 

रह ना सके थे एक पल भी दूर हम से,
तब जुदाई की सौगात देके आये है,
चाहत जब जरुरत बनी थी उनकी,
तब बेवफाई का तोफ़ा देके आये है ,
अरे पागल ये मत बता,
कि दिवानगी क्या होती है,
हम तो अपनों का पूरा जहा बहाके आये है। … 

बस आज कुछ हसरते बाकी है,
बुझे हुये थोडेसे अरमान बाकी है,
ये बहती हवा जाके बता,
मेरे हक़ के थोड़े आंसू बहाना बाकी है,
अरे पागल ये मत बता,
की इबादत क्या होती है,
हम तो अपने हिस्से की सारी खुदाई देके आये है। …