Sunday, 19 January 2014

कुछ ऐसा सितम दिजीये …

रहनुमा बने हो आप,
तो फिर रहम किजीये,
नासूर जख्म रोये कभी, 
ऐसा भरम दिजिये,
तनहा रुह मजबूर रहे हर पल,
ऐसा करम किजिये,
और बहते आंसू बस लहू बन जाये कभी ,
कुछ ऐसा सितम दिजीये … 

रहनुमा बने हो आप,
तो फिर रहम किजीये

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