Tuesday, 1 April 2014

प्यार की कश्ती...

प्यार की कश्ती को,
डूबाके आये है,
भरी महफ़िल से,
शमा बुझाके आये है,
अरे पागल ये मत बता,
की गम क्या होता है,
हम तो दर्द का पूरा समन्दर पिलाके आये है। … 

जो नज़रें हटती नही थी हमसे,
उसे रुलाके आये है,
जो सांसे कभी महकती थी हमसे,
उसे ठुकराके आये है,
अरे पागल ये मत  बता,
की यादे क्या होती है,
हम तो सपनो का पूरा पहाड़ जलाके आये है। … 

रह ना सके थे एक पल भी दूर हम से,
तब जुदाई की सौगात देके आये है,
चाहत जब जरुरत बनी थी उनकी,
तब बेवफाई का तोफ़ा देके आये है ,
अरे पागल ये मत बता,
कि दिवानगी क्या होती है,
हम तो अपनों का पूरा जहा बहाके आये है। … 

बस आज कुछ हसरते बाकी है,
बुझे हुये थोडेसे अरमान बाकी है,
ये बहती हवा जाके बता,
मेरे हक़ के थोड़े आंसू बहाना बाकी है,
अरे पागल ये मत बता,
की इबादत क्या होती है,
हम तो अपने हिस्से की सारी खुदाई देके आये है। …

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