Monday, 26 May 2014

बीती रात की याद...

बीती रात की याद मत दिलाओ यारों,
बस कुछ ऐसी गुजारी हैं,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ये जान भी नहीं जाती …

सांसो का सजना पलको पे,
क्या कभी देखा है यारों,
आँसुओ का हसना होटो पे,
क्या कभी सुना है यारों,
खुद का होके भी खुद का ना होना,
सब कुछ होके भी सब खो देना,
क्या ऐसा पल कभी जिया है यारों …

उन लम्हों की याद मत दिलाओ यारों,
बस कुछ ऐसी गुजारी हैं,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ये जान भी नहीं जाती …

दूरिया होक भी पास होना,
होश मैं होक भी बेहोश होना,
खयालो को लेके खयालो तक जाना,
मंजिलो से मिलने मंजिल को ले जाना,
ऐसा कभी सोचा है यारों,

बिखरे कुछ सपनो की याद मत दिलाओ यारों,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ओ ख्वाब भी नहीं जाते  …


अब किस किस को सुनए,
और किस किस को रुलाये,
अपने हिस्से का जो गम है,
क्यों औरो को जताये,

उन रास्तो की याद मत दिलाओ यारों,
के अब चल भी नहीं पाते,
और छोड़े भी नहीं जाते …


बीती रात की याद मत दिलाओ यारों,
बस कुछ ऐसी गुजारी हैं,
के अब नींद भी नहीं आती,
और ये जान भी नहीं जाती …

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