Thursday, 28 January 2016

तन्हाई भी कुछ चिज़ होती हैं ... वरना जुदाई का गम इस ज़माने में नहीं होता...

सलाम महफ़िल में ही नहीं होता,
दिलो का मिलना सिर्फ खयालो में ही नहीं होता,
तन्हाई भी कुछ चिज़ होती हैं दोस्तो,
वरना जुदाई का गम इस ज़माने में नहीं होता ...

कसूर नज़रों का होता तो पलकें बंद कर लेते हम ,
कशिश हवा की होती तो सांसे रोक लेते हम ,
दिए का जलना , फूलों  का खिलाना,
सबसे मुँह फेर लेते हम ,
पर खता तो दिल की थी ,
क्या महोब्बत करना छोड़ देते  हम ...

आँसू सिर्फ गमो से  नहीं  मिलते,
रिश्ते कभी दूरियों से  नहीं टूटते ,
दीवानगी भी कुछ चीज़ होती है,
वरना अपना नाम इस ज़माने में नहीं होता...

इश्क़ तो सुकून है सर्दियों का,
इश्क़ तो जूनून हैं वादियों का ,
कोई पायेगा खोके,
कोई खोएगा पके,
यही  तो दस्तूर है ज़िन्दगी का....
खयालो के इस भीड़ में ,
ज़माने/जीवन के इस दौड़ में ,
आज जाके बैठे है किसी और के जनाजे में ,
देंगे धोखा ख़ुद को,
जी रहे है उल्फत में फिर भी,
देके दिलासा सबको। ..

वे कहते थे कभी...
जरूरत ही सबसे बड़ी इबादत है ,
हम ने समझा,
उनकी इबादत ही हमारी सबसे  बड़ी जरूरत है....

माना उस दिन,
छोटी थी मेरी गली उजाले के लिए,
आज आके  लो ,
चमक रही है सारे ज़माने के लिए....


अहसान सिर्फ अपनोसे ही नहीं मिलता,
इन्तकाम सिर्फ दुश्मनों से ही नहीं मिलता ,
शिकायत भी कुछ चीज है दोस्तों ,
वरना खुदा का नाम ज़माने मै नहीं होता। ...

सलाम महफ़िल में ही नहीं होता
दिलो का मिलना सिर्फ खयालो में ही नहीं होता
तन्हाई भी कुछ चिज़ होती हैं
वरना जुदाई का गम इस ज़माने में नहीं होता ...

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