Tuesday, 24 December 2013

मगर सहमे दीलो का ओ धडकणा , बाकी आज भी है …

मगर सहमे दीलो का ओ धडकणा ,
बाकी आज भी है …

रुसवा कूच कसमे है,
और बाकी है कई साये,
अनकही कूच आहते है,
और बाकी है कई राहे,
मगर सहमी आंखो का ओ पानी,
बाकी आज भी है…

छुटे कूच रिश्ते है,
और तुटे है कई नाते,
अनकही कूच बाते है,
और बाकी है कई यादे,
मगर सहमे दीलो का ओ धडकणा ,
बाकी आज भी है… 

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